गुरुवार, 6 नवंबर 2025

अपनापन चाहिए

मैं वो स्त्री नहीं हूँ
जो हर वक़्त किसी का ध्यान या प्यार माँगती है।
लेकिन अगर कभी मुझे तुम्हारा ध्यान चाहिए लगे,
तो समझ लेना उस दिन मेरा दिल बहुत थक गया था।
शायद मैं भीतर से बिखरी हुई थी,शायद बस किसी का एक सच्चा “कैसी हो?” सुनना चाहती थी।

जब मैं किसी से बात करने की कोशिश करती हूँ,तो इसलिए नहीं कि मैं किसी को परेशान करना चाहती हूँ,
बल्कि इसलिए कि अब और मज़बूत बने रहना मुश्किल लगता है। कभी-कभी चाहती हूँ कि कोई मुझे बिना कहे समझ जाए,मेरी ख़ामोशी में छिपा दर्द सुन ले और बस एक पल के लिए मेरे लिए ठहर जाए।

मैंने मुस्कान के पीछे अपने आँसू छुपाने की आदत डाल ली है,इतना कि अब कभी-कभी भूल जाती हूँ कि सच में समझे जाने का एहसास कैसा होता है।तो अगर कभी मुझे ध्यान माँगते देखो तो मत सोचो कि मैं कमज़ोर हूँ वो बस मेरी ख़ामोश पुकार है,थोड़े से सुकून की,थोड़े से अपनेपन की थोड़े से तुम्हारे प्यार की💕💕

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