गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016

हा मिलता है

दिल वो फूल है जो टूटकर ही खिलता है
इसकी खूशबू से फिर आंसू भी मिलता है।।

जख्म के कांटे हैं जहां जिस्म के पर्दे तले
वहीं रूह को जीने का माहौल भी मिलता है।।

कभी हुस्न से फासला बनाकर देखो
कुछ तजरबा जुदाई के पलों में भी मिलता है।।

शबे-तन्हाई में ऐ दिल बेबस ना हो
सब्र कर, मंजिल जरा देर से भी मिलता है।।

नही आया

मुझे अश्कों की मोती दिखाना भी नही आया।
छुपाना था जिसे सबसे छुपाना भी नही आया।।

शबे गम को कभी फुर्सत में कहना था मगर।
मेरे हालात से मुझको ही मुकरना भी नही आया।।

मै हूँ एक फूल सी नाजुक मुझे काटों ने घेरा है।
मगर अफ़सोस है मुझको बिखरना भी नही आया।।

तेरे राहों पे चलने की ख्वाहिश थी बहुत मुझको।
मगर गम है की कांटो कोही सिमटना भी नही आया।।

कभी सुख की पुरवाई गमो को दूर ले भागी।
ख़ुशी के अश्क आँखों से गिराना भी नही आया।।

नही आया

मुझे अश्कों की मोती दिखाना भी नही आया।
छुपाना था जिसे सबसे छुपाना भी नही आया।।

शबे गम को कभी फुर्सत में कहना था मगर।
मेरे हालात से मुझको ही मुकरना भी नही आया।।

मै हूँ एक फूल सी नाजुक मुझे काटों ने घेरा है।
मगर अफ़सोस है मुझको बिखरना भी नही आया।।

तेरे राहों पे चलने की ख्वाहिश थी बहुत मुझको।
मगर गम है की कांटो कोही सिमटना भी नही आया।।

कभी सुख की पुरवाई गमो को दूर ले भागी।
ख़ुशी के अश्क आँखों से गिराना भी नही आया।।

बुधवार, 12 अक्टूबर 2016

मौका देती है जिंदगी

मची है एक हलचल सी
कुछ करने की,
मौके पे मौका देती जिंदगी ,
कितने को संभाला
कितना गवांया ,
जो खोया सो गया
मौका देती जिंदगी,
पर समय कहता
कुछ और ,
ध्यान रख…
मौका देती जिंदगी
पर मै जिंदगी नहीं
मै तो तेरा
समय हूँ
एक बार गया ..
तो वापस  नहीं आऊंगा…
पहल कर
वरना जिंदगी भी
थक कर मौके न देगी
पहल कर तू पहल कर !
इसी विचार के साथ शुभ रात्री

हा मिलता है

दिल वो फूल है जो टूटकर ही खिलता है
इसकी खूशबू से फिर आंसू भी मिलता है।।

जख्म के कांटे हैं जहां जिस्म के पर्दे तले
वहीं रूह को जीने का माहौल भी मिलता है।।

कभी हुस्न से फासला बनाकर देखो
कुछ तजरबा जुदाई के पलों में भी मिलता है।।

शबे-तन्हाई में ऐ दिल बेबस ना हो
सब्र कर, मंजिल जरा देर से भी मिलता है।।

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2016

सोने दे

वर्षो से तरसे है सुकून ए नींद की खातिर
अब हिज्र की रात है जरा चैन से सोने दे।।

कब से चाहा था कभी सुकून मिले हमको।
ख़ुशी की घड़ी में कुछ मेरे दर्द को खोने दे।।

क्या मालूम  कब जिंदगी की शाम हो जाए।
लगजा सीने से मेरे हर दर्द को तो रोलेने दे।।

कवायतें रियायतें बहुत देखे है सुने है मैंने।
मानूँगी तेरे हर एहसान जरा वक्त तो होने दे।।

उजाले फ़क़त चैनके खातिर चुना था तुझको।
दुवा का दौर अभी कहाँ?जरा शाम तो होने दे।।

दिव्यापाण्डेय ऋतू
05-09-2016

सोमवार, 3 अक्टूबर 2016

अवसाद

हा सच अवसाद में है जिंदगी
रिस्तो के फसाद में है जिंदगी।।

बहुत कश्मोकश में है हम तो
जाने क्या तलाश में है जिंदगी।।

टूट कर बिखरी है उम्मीदें सारी
लेकिन किस आस में है जिंदगी।।

बहुत टूटी हूँ रवायतों के चलते
अब मौत की तलाश में है जिंदगी।।

#बेवजह

रविवार, 2 अक्टूबर 2016

रूह तंग है

जीवन और मृत्यु
दो ही सत्य है
जीवन का अनुभव कड़वा सा
तीखा सा जहर सा
निकला।
उलझन प्रतिकार सब
बन गए जीवन का
आधार।
मोह माया में क्या रखा है
क्या अपना है
किराए की जिंदगी
किराए का घर
किराए के लोग
कठपुतली सी हो गयी जिंदगी
डोर घुमाने वाला
अब इंसान नही
घर में जो बसता था
अब वो भगवान् नही
तिरस्कार से तंग
जिंदगी बन गयी जंग।।
अब मौत आ
तुझे गले लगा लूँ
तेरे संग गा लूँ
तुझसे लिपट ले
तेरे संग चलना है
रूह को अब चैन नही
किराए की काया में
छीन लो ना साँसे मेरी
क्या रखा है माया में।।

#बेवजह