बुधवार, 26 नवंबर 2025

साथी जो आत्मा को ऊंचा उठाए

साथी ऐसा चुनो…
जो तुम्हारे सपनों पर ताले न लगाए,
बल्कि हर सुबह तुम्हारी उड़ानों में नई हवा भर दे।
जो तुम्हें समझाने नहीं,
समझने चले…
जो तुम्हें बदलने नहीं,
और बेहतर बनने में तुम्हारा हाथ थामे चले।

साथी ऐसा चुनो…
जिसकी उपस्थिति में तुम खुद को खोओ नहीं,
बल्कि पहले से ज़्यादा खुद को पाओ।
जिसकी निगाहों में हुक्म नहीं,
विश्वास की रोशनी हो।
जिसके शब्दों में आदेश नहीं,
सम्मान की गर्माहट हो।

प्रेम तभी खिला हुआ होता है,
जब उसमें तनाव का नहीं…
सुकून का मौसम बहता है।
जहाँ कोई तुम्हें तराजू पर न तोले,
बल्कि तुम्हारी थकान को भी प्यार समझे।

साथी ऐसा चुनो…
जो तुम्हारे आँसुओं को कमजोरी न कहे,
बल्कि उन्हें धैर्य की भाषा समझे।
जो तुम्हारे ख़ामोश दिनों में
तुम्हारे भीतर की आवाज़ सुन सके।
जो तुम्हारी उपलब्धियों से नहीं डरता,
बल्कि उन्हें अपना गर्व मानकर मुस्कुराए।

तुम्हें ऐसा हाथ चाहिए,
जो पकड़े इसलिए नहीं कि खो देने का डर है,
बल्कि इसलिए कि साथ चलने का विश्वास है।
ऐसा कंधा चाहिए,
जिस पर सिर रख कर तुम टूटो नहीं…
बल्कि फिर से बन जाओ।

संबंध का अर्थ यह नहीं कि
तुम्हारी आज़ादी छीन ली जाए —
संबंध का अर्थ है
तुम्हारी आज़ादी को सुरक्षा मिल जाए।

और स्त्री…
तुम्हारी दुनिया को छोटा करने वाला प्रेम नहीं,
तुम्हारी दुनिया को बड़ा करने वाला प्रेम योग्य है।
तुम्हें ऐसा साथी चाहिए —
जो तुम्हारे भीतर की आग से जलने नहीं,
उसमें रोशनी ढूँढने आए।

साथी वही हो…
जो तुम्हें गिरने पर संभाले नहीं,
गिरने से पहले पहचान ले।
जो तुम्हें बोझ न दे,
बल्कि आत्मबल दे।
जो तुम्हारी धड़कनों में खलल नहीं,
संगीत बनकर बसे।

क्योंकि प्रेम का असली रूप —
चिंता, तनाव और दबाव नहीं,
बल्कि आत्मा को ऊँचा उठाने वाला हाथ है।

और एक दिन जब तुम सही साथी चुनोगी —
तब समझोगी
प्रेम बोझ नहीं…
प्रेम ढाल है।
जो दुनिया से लड़ने की हिम्मत दे,
खुद से हारने का डर मिटा दे।

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