सोमवार, 24 नवंबर 2025

मुहब्बत

चाहत का क्या…
ये तो किसी की भी मुस्कान पर
अनजाने में ठहर जाए,
रास्ता मिले तो पल भर में
धड़कनों तक पहुँच जाए।

पर मोहब्बत…
वो स्त्री के दिल की पुकार है,
हर आँसू की वजह
और हर हँसी का आधार है।

चाहत में हाथ थामना आसान होता है,
पर मोहब्बत में
बिछड़कर भी निभाना होता है।

स्त्री का दिल—
जब चाहे, किसी पर भी आ जाए,
पर जब प्यार हो जाए—
तो एक ही नाम में उम्रभर सिमट जाए।

चाहत में थोड़ा सा अपनापन,
पर मोहब्बत में
पूरी आत्मा का अर्पण—
यही स्त्री का धर्म है,
यही उसका सत्य है।

चाहत में “तुम चाहो तो अच्छा”,
पर मोहब्बत में
“तुम ही चाहो तो दुनिया सुंदर”—
यही स्त्री के एहसासों का स्तर है।

स्त्री के लिए मोहब्बत—
एक वचन है, एक तपस्या है,
वो टूटकर भी किसी के लिए जुड़ी रहती,
रोकर भी किसी के चेहरे की
मुस्कान बनी रहती।

तो कहना आसान है—
चाहत किसी से भी हो जाए,
पर मोहब्बत?
स्त्री की मोहब्बत—
बस एक से होती है,
और उसी में
उसका पूरा ब्रह्मांड धड़कता है।

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