रविवार, 11 अक्टूबर 2020

कवि हु मैं

खुद से खुद का परिचय बस इतना सा है...
हा कवि हूँ मैं
कविता ही मेरा परिचय
कविता ही मेरा धर्म
कविता में ही ईमान है
कविता से ही सम्मान है
क्योंकि कवि हूँ मैं...
अलंकार छंद से बधी हूँ
शब्द संयोजन से गढ़ी हूँ
हा परिपक्व नही हूँ
पर कवि हूँ मैं...
कभी भावो में बहकर
कभी आहों में जकड़कर
रोज निर्माण करती हूँ 
हा रोज एक कविता गढ़ती हूँ
परिपक्व तो नही हूँ
पर कवि हु मैं....
जीवन की रीत समझना
आसान नही होता
हर इंसान में हमेशा
ईमान नही होता
गम जब भी मेहरबान होते है
लोग फिर खुशी को रोते है
सबके हालात समझना आसान नही होता
पर कवि हूँ मैं...
कभी स्वपन सजीले
कभी हालात रेतीले
गढ़ती हूँ
समझती हूं
हा परिपक्व नही हूँ
पर कवि हूँ मैं..
रोते हँसते
मस्ती में गाते
खुद में रमते
रिश्ते नातो को समझते
समाज की रीत को निभाते 
एक कविता लिखती हु
क्योंकि कवि हु मैं...

सोमवार, 5 अक्टूबर 2020

निर्भया और मनीषा सहित तमाम हादसों की शिकार बेटियों को समर्पित

तमाम उम्र तमन्नाओं में उलझायी गयी।
खिलौना दे दे कर हरदम बहलाई गयी।।

मासूम सा दिल समझ न सका कुछ भी।
मेरे लिए ही ये तमाम दस्तूर बनाई गयी।।

अपनो से यकीन तब और उठ गया मेरा।
करके रुसवा जब दुनिया से हटाई गयी।।

फूलों से सज के जाती अरमान था यही।
आज कांटो से ही मेरी अर्थी सजाई गयी।।

बड़े अरमानों से सजती डोली मेरी भी।
पर हसरतों के चिता में मै जलायी गयी।।

मैं तो एक बेटी थी क्या कुसूर था मेरा।
बाद मरने के  मेरी इज्जत उड़ाई गयी।।

न सताओ अब तो चैन से सोने दो मुझको।
मिन्नतों के बाद भी न मेरी जगहँसाई गयी।।