अगर तुम्हें भरी भीड़ में
झुकने का सबब लगे,
तो बेहतर है
मेरे रास्तों से हट जाओ—
मैं सम्मान को जेब में नहीं रखती,
दिल में बसाकर चलती हूँ।
मैं वो नहीं
जो दूसरों की शक्ल देखकर
अपना सिर झुकाए।
मैं वो धड़कन हूँ
जो अपने साहस की आवाज़ पर
गर्व से चलना जानती है।
तुम्हारे अहंकार की कसी हुई चप्पलें
मेरे आत्म-सम्मान पर चुभती हैं,
और मैं इतनी नासमझ नहीं
कि रिश्तों की खातिर
अपने मन को लहूलुहान कर दूँ।
कभी फुर्सत में सोचना—
जो लोग तुम्हें
अपने साथ पर शर्म दिलाएँ,
वे तुम्हारे साथ के क़ाबिल ही नहीं।
मैं उन नज़रों से बहुत दूर ठीक,
जो मेरे लिए नफ़रत बचाकर चलती हैं।
मैं उन मुस्कुराहटों से भी परे ठीक,
जो पीठ पीछे ज़हर हो जाती हैं।
मैं चाहूँ भी तो
अपनी उड़ान को
किसी की ईगो की जंजीर में बाँध नहीं सकती—
मेरा आसमान बड़ा है,
मेरी चाहतें गहरी हैं,
और मेरा वजूद
भीड़ की ताली पर नहीं,
अपने दम पर सांस लेता है।
तो सुन लो—
अगर मेरा हाथ थामने में
तुम्हें दुनिया की नज़रों का डर लगे,
तो थामना ही मत।
क्योंकि जो हाथ
परछाई की तरह अपने हों,
वो भीड़ की परवाह नहीं करते।
मैं खुद अपनी ताक़त हूँ,
और खुद अपनी मंज़िल।
मुझे भीड़ में खोना नहीं,
भीड़ से ऊपर उठना आता है।
जो मेरे पास रहकर भी
मेरी क़ीमत न समझे,
उनसे दूर रहना ही श्रेष्ठ है—
क्योंकि मैं अपमान को
कभी भी आभूषण बनाकर नहीं पहनती।
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