बिना छुए भी
आपकी आत्मा को गले लगा लेते हैं—
कभी एक नज़र से,
जिसमें अचानक पूरा ब्रह्मांड ठहर जाता है,
और आपको लगता है
कि सारी थकान किसी ने चुपके से उतार ली हो।
कुछ लोग
सिर्फ एक शब्द में
आपकी टूटती हुई दुनिया को फिर से जोड़ देते हैं,
जैसे कोई दरकती दीवार पर
मोमबत्ती की लौ रख दे
और अँधेरा खुद-ब-खुद पिघल जाए।
और कुछ लोग…
खामोशी में भी
इतना कुछ कह जाते हैं
कि आपके भीतर का तूफ़ान
धीरे-धीरे
झरने की तरह बहने लगता है।
वे आवाज़ नहीं,
एक एहसास होते हैं—
जिन्हें सुनने के लिए
कानों की नहीं,
एक थके हुए दिल की ज़रूरत होती है।
वे लोग,
जो पास न होते हुए भी
सबसे पास हो जाते हैं,
जिन्हें छूना ज़रूरी नहीं होता
क्योंकि वे वहाँ होते हैं
जहाँ कोई पहुँचता नहीं—
आपकी रूह के सबसे शांत कोने में।
कभी एक मुस्कान में,
कभी एक अनकहे सवाल में,
कभी बस इस बात में कि
वे आपको समझते हैं—
बिना बताए,
बिना समझाए,
बिना किसी शोर के।
ऐसे लोग
ईश्वर की लिखी हुई वे कविताएँ होते हैं
जो मनुष्य के रूप में उतरते हैं—
और आपकी जिंदगी में
एक ऐसी गर्माहट छोड़ जाते हैं
जिसका स्रोत आप आज तक नहीं समझ पाते।
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