मैं जानती हूं — समंदर में उतरी नावें काग़ज़ की किस्मत नहीं पूछतीं।
जो साहस में सांसें भरते हैं,
वो तूफ़ानों से भी रास्ते उधार ले लेते हैं।
लकीरों का लिखा एक सुझाव होता है,
फ़ैसला नहीं।
मेरा मन, मेरे कदम और मेरी जिद —
एक नया विधान लिखने का हक़ रखते हैं।
मैंने जीवन को हमेशा एक कैनवास माना,
जहां शक़ का रंग फीका पड़ता है
और भरोसा सबसे चमकदार रंग बन जाता है।
तभी जाना — कि क़िस्मत सिर्फ घोषणा है,
पर नियति बनना — मेरी मेहनत का अधिकार है।
अगर लकीरों में बाधाएं थीं,
तो मैंने रास्ते लंबाई में नहीं — ऊंचाई में बनाए,
और दुनिया को हैरत हुई
कि इतनी नाजुक उंगलियों ने
पहाड़ों की जड़ें हिला दीं।
कभी रातें प्रकाश के लिए नहीं रोईं,
रात कठिन थीं — पर मैंने आंखों में सूरज उगा लिया।
कांटे चुभे — पर मैंने रक्त नहीं, निर्णय बहाया।
और वही निर्णय मेरी तकदीर की
तारीख़ बदलता गया।
आज भी लोग कहते हैं —
क़िस्मत में जो लिखा है, वही मिलता है।
मैं मुस्कुरा कर कहती हूं —
क़िस्मत भी अपनी लिखावट बदल देती है
जब इंसान अपनी सोच की भाषा बदल देता है।
मेरी मंज़िलें मेरे कदमों की मेहमान नहीं,
मेरे साहस की निवासी हैं।
मेरे सपने, मेरे माथे पर मुकुट नहीं,
मेरे परिश्रम की पहचान हैं।
इसलिए आज भी मैं दुआ नहीं —
इरादे पहनकर चलती हूं।
दुनिया रुकावटों की बात करती है,
और मैं रास्ते बनाने की।
कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझी,
क्योंकि मुझे यक़ीन है —
अनलिखा भी लिखा जा सकता है
जब दिल की कलम डर के पन्ने फाड़ दे
और उम्मीद की स्याही से
भविष्य को पुनर्लिख दे।
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