ना आसमान की, ना दुआओं की रौशनी की,
ना सितारों की चमक की, ना चाँदनी की शरारत की,
बस तेरे नाम का एक सुकून चाहिए मुझे—
जो दिल की धड़कनों को अर्थ दे जाए।
तू है तो हर सन्नाटा गुनगुनाने लगता है,
हर दर्द में एक मिठास उतर आती है,
तेरे बिना तो साँसें भी बोझ सी लगती हैं,
तू आ जाए तो ज़िंदगी खुद कविता बन जाती है।
कभी सोचा था, दुनिया बड़ी है,
कई रिश्ते, कई चेहरे होंगे,
पर हर चेहरा धुँधला पड़ा,
जब तू मेरे भीतर के आईने में उतर आया।
तू है तो वक़्त ठहर जाता है,
तेरे बिना हर घड़ी अधूरी लगती है,
मैंने खुद से कई बार कहा—
"चल आगे बढ़, किसी और से बात कर..."
पर दिल हर बार तेरे नाम पर टिक जाता है।
तू मेरे शब्दों की आत्मा है,
तेरे बिना मेरी भाषा भी मौन है,
तेरे बिना कविता भी अधूरी,
तेरे बिना मैं भी अधूरी।
तेरे सिवा जो भी मिला,
वो बस समय काटने जैसा था,
तू मिला तो वक़्त ने खुद को मुझमें बसते देखा।
लोग पूछते हैं—
"क्या तेरे बिना जीना मुश्किल है?"
मैं कहती हूँ—
"जीना तो आसान है, पर महसूस करना असंभव।"
तेरी यादों ने ऐसा जाल बुना है,
जिसमें मैं हर रोज़ गिरती हूँ,
और हर रोज़ उसी से उठकर फिर तुझमें खो जाती हूँ।
तू मेरे वजूद का वो हिस्सा है,
जिसे काट दूँ तो मैं बिखर जाऊँ,
तू मेरी साँसों का वो नाम है,
जिसे पुकारूँ तो खुद को पा जाऊँ।
ना भगवान चाहिए, ना किस्मत की रहमत,
ना कोई ताज, ना कोई दौलत,
बस तू चाहिए—
क्योंकि तेरे बिना मैं कोई "मैं" नहीं।
तू अगर मिल जाए,
तो मैं अपनी हर अधूरी सुबह पूरी कर लूँ,
तू अगर पास आ जाए,
तो मैं अपनी हर रात को सवेरा कह दूँ।
मुझे किसी की ज़रूरत नहीं तेरे सिवा,
क्योंकि तेरे बिना मेरा कोई कल नहीं,
कोई मैं नहीं, कोई जहाँ नहीं,
बस तू है — और तू ही सदा रहेगा।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें