बुधवार, 26 नवंबर 2025

धन्यवाद तुमने मुझे इतना मजबूत बनाया



कभी सोचा था किस्मत शायद
टूटी हुई कंगन सी होगी,
कभी चमके, कभी चुभ जाएगी,
कभी पास रहे, कभी रूठ जाएगी।

मगर आज आई आईना लेकर
तकदीर मेरे सामने खड़ी थी,
होंठों पर मुस्कान थी उसकी
नज़रों में पूरी एक सदी थी।

कहने लगी—
“तू सोचती रही कि मैं तुझे भूल गई,
पर मैं तो हर मोड़ पर तेरी रखवाली करती रही,
तेरी आँखों की आंसू-पंक्तियाँ
मैं सीने में छुपाती रही।

जो झेल गई तू चुप रहकर
वो भी मेरी ही दी हुई परीक्षाएँ थीं,
जो बचा लिया तू खुद को उनसे
वो मेरी सबसे प्यारी कमाई थीं।”

मैं अवाक थी…
ना गर्व, ना शिकवा, बस मौन,
और किस्मत ने हंसकर कहा —

“पगली… तू जिसके पास है
वो सब यूँ ही नहीं आया,
ये तेरा हिस्सा नहीं,
मेरी पसंद है—
जिसे मैंने बड़ी मोहब्बत से सजाया।

हर रिश्ता, हर जंग, हर ठोकर,
हर आँसू की गिरती बूंद,
सब मेरी चौखट से होकर गुज़रे हैं,
कोई भी दान में नहीं मिला है,
तुझे हर चीज़ चुनी हुई मिली है,
बड़ी तड़प और दुआओं के बाद।”

फिर उसने धीमे से
मेरे कंधे पर हाथ रखा —

“अब ज़रा संभालकर जीना,
तू हादसों से बनी है, खोखली नहीं,
तू टूटकर भी ज़िंदा रही है,
मिट्टी नहीं — तू आग है, राख नहीं।

दुनिया समझेगी तकदीर का खेल,
पर मैं जानती हूं असल कहानी —
मैंने ख़ास तुझे चुना है
ना कि तुझे कोई निशानी।”

आज पहली बार
किस्मत के नाम मैंने सैल्यूट किया,
ना शुक्र, ना शिकवा —
बस उसे खुद की तरह महसूस किया।

और दिल ने धीरे से कहा —
“अगर मैं आज यह हूं
तो सिर्फ़ उसकी दी हुई लड़ाइयों के कारण,
वो कहती है — संभालकर रखना मुझे,
और मैं कहती हूं —
धन्यवाद कि तुमने मुझे बनाया इतना मजबूत।”

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