गुरुवार, 20 नवंबर 2025

खामोशी की आवाज

मैंने सीखा है खामोशी से बात करना,
आँखों की भाषा से यादें सजाना।

तूफानों में भी मुस्कुराना हमने,
टूटते हुए खुद को संवारना हमने।

हर गिरते पल में चमक ढूंढ ली,
हर अधूरी ख्वाहिश में ख़ुद को पा लिया।

क्योंकि जीवन वही है,
जो टूटकर भी मुस्कुराए…
और रुक कर भी आगे बढ़ जाए।

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