आत्मा से जुड़ते हैं,
कुछ लोग मिलते नहीं,
जीवन में उतर आते हैं —
तुम वैसी ही एक उपस्थिति हो,
जो शब्दों से परे,
मेरे हृदय की भाषा बन गई है।
तुम्हारे साथ बीते पल
सिर्फ यादें नहीं — इतिहास हैं मेरे भीतर,
जहाँ हर मुस्कान, हर झगड़ा,
हर मौन अपने अर्थ छोड़ गया है।
तुम वो आईना हो
जिसमें मैं खुद को सच्चाई से देख पाती हूँ,
क्योंकि तुम्हारी नज़रों में
कोई मुखौटा टिक नहीं पाता।
जब दुनिया ने पीठ मोड़ी,
तुमने सिर्फ कंधा नहीं,
पूरा आसमान थमा दिया,
जहाँ मेरी थकी हुई उम्मीदें
थोड़ा आराम पा सकें।
तुमने मुझे सिखाया —
कि दोस्ती सिर्फ साथ चलने का नाम नहीं,
कभी-कभी चुप रहकर भी
किसी का मन संभालना होता है।
तुम मेरे शब्दों की सीमाओं के पार हो,
एक ऐसी धुन हो
जो जीवन की हर ताल को अर्थ देती है,
एक ऐसा स्पर्श
जो आत्मा तक पहुँच जाता है।
कई बार तुम कुछ नहीं कहते,
फिर भी समझ लेते हो,
और मैं सोचती हूँ —
कहीं यही तो “संबंधों की पूर्णता” नहीं?
तुम्हारे सम्मान में झुकना
किसी बंधन की बात नहीं,
ये उस कृतज्ञता का नम्र प्रणाम है
जो मेरे हृदय में हर धड़कन के साथ गूंजता है।
तुम मेरे जीवन का वो अध्याय हो
जहाँ सत्य, स्नेह, और सन्नाटा
तीनों का संगम होता है,
जहाँ कोई छल नहीं,
सिर्फ आत्मीयता का प्रकाश है।
मैंने बहुत कुछ पाया इस जीवन में,
पर अगर कोई रिश्ता
मेरे अस्तित्व का गौरव कहलाए —
तो वो तुम्हारी मित्रता है।
तुम्हारा होना ही आशीर्वाद है,
तुम्हारा समझना ही सम्मान,
और तुम्हारे जैसे मित्र का मिलना —
ईश्वर का सबसे सुंदर निर्णय।
जिनका सम्मान मेरे जीवन में सबसे
ऊपर है वो तुम हो..बस तुम
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