बुधवार, 29 अप्रैल 2020

इरफान की याद में

आदमी बुलबुला है पानी का 
और पानी की बहती सतहा पर 
टूटता भी है डूबता भी है 
फिर उभरता है, फिर से बहता है 
न समुंदर निगल सका इस को 
न तवारीख़ तोड़ पाई है 
वक़्त की हथेली पर बहता 
आदमी बुलबुला है पानी का 
  आज गुलजार साहब की ये कविता मन को फिर से विचलित कर गयी।हम हिन्दू मुस्लिम करते रहे और इसी बीच एक ऐसे व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति के पंचतत्व में विलीन होने की खबर मिली जो जात पात के दायरे से कही दूर था और वो व्यक्ति कोई और नही फ़िल्म जगत के जाने माने कलाकार इरफान खान थे।2 साल जिंदगी से जंग लड़ते लड़ते दुनियां को एक नया सबक देकर दुनियाँ से अलविदा कर गए।जिंदगी क्या है और जिंदगी जीने का सही तरीका क्या है ये सबक सीखा गए।क्या हिन्दू और क्या मुसलमान सब धर्म धरे के धरे रह गए ऐसा लगता है की जात धर्म के मुँह पर एक जोरदार तमाचा मारकर वो इंसानियत को विजयी कर गया और ये बता दिया कि इंसानियत को ताख पर रखकर न कोई हिन्दू हिन्दू रह जायेगा और किसी तरह की कट्टरता को अपना कर न कोई मुस्लिम मुस्लिम बन पाएगा।
  धन्य है वो आत्मा जिसके लिए आज देश की हर आँख नम है जिसका जाना लोगो को खला और रुला गया।
  अब मैं आप सबसे कहना चाहती हूं कि हिन्दू या मुस्लिम बनने से पहले आप एक इंसान बनो और ऐसा इंसान जो दुनिया से जाए तो भी दुनियां में उसका अक्स बना रहे भले याद के रूप में ही।आज कसाब या छोटा राजन बनने की जरूरत नही आज इंसान बनने की जरूरत है आप किसी को कर्मफल देने के अधिकारी मत बनिये प्रकृति खुद ही न्याय कर देगी...
    मुझे हमेशा याद रहेंगे मेरे देश के वो महान व्यक्ति जिनकी इज्जत इस दिल मे हमेशा रहेगी जिसमे अटल जी कलाम जी सुषमा जी मनोहर पर्रिकर जी जगजीत सिंह जी और अब इरफान साहब...
  जिंदगी को एक नया सबक देने वाले इन सभी महान बिभूतियो को आज एकबार फिर से मैं दिल से नमन करती हूं ईश्वर आप सबकी कीर्ति को युगों युगों तक अमर रखे।
  जय हिंद