हा दर्द है मुझे
इस बात का की तुम मात्र
शब्दो मे ही सिमट के रह जाते हो
तुम्हारे शब्द
मुझे शांत तो कर देते है
पर नही खत्म होता
मात्र शब्दो से
मेरा दर्द
कभी कभी लगता है
अनदेखा करते हो
कभी कभी लगता है
परवाह है तुम्हे भी
मेरी तरह सबकी
ख्वाहिशे पूरी करने की
पर एक शब्द मेरा भी
मैं ना रहूंगी तो
क्या तुम चल लोगे
अगर हा तो
रहने दो दर्द को नासूर
बनने दो.....
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
रविवार, 24 जून 2018
दर्द को नासूर बनने दो
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