मैं स्त्री हूँ,
मैं उस अनदेखी लड़ाई की आवाज़ हूँ,
जो हर दिन भीतर चलती रहती है,
हर शब्द, हर कदम, हर नज़र के बीच।
मेरी आत्मा खोजती है
सिर्फ अस्तित्व नहीं,
बल्कि सम्मान,
अपने भीतर की सचाई,
अपने अधिकार की पहचान।
मैं अपने डर से लड़ती हूँ,
जो कभी मेरी पहचान को रोकता था।
मैं अपने भीतर के शंकाओं से भिड़ती हूँ,
जो मुझे छोटा दिखाने की कोशिश करती थीं।
मैं स्त्री हूँ,
मैं समाज की सीमाओं और परिभाषाओं से पार जाती हूँ।
वे कहते थे – "तुम नहीं कर सकती,"
पर मेरी आत्मा जानती है,
कि मेरा सम्मान मेरी शक्ति में है,
और मेरी शक्ति मेरी आत्मा की आवाज़ में।
मैं गिरती हूँ,
मैं टूटती हूँ,
पर मैं उठती हूँ,
क्योंकि मेरी आत्मा ने मुझे सिखाया है,
कि आत्मसम्मान की लड़ाई
कभी समाप्त नहीं होती।
मैं अपनी हर हार से सीखती हूँ,
हर आँसू मुझे और मजबूत बनाता है।
मैं वह दीपक हूँ,
जो खुद को जलाकर
दूसरों के लिए राह बनाती है।
मेरी आत्मा कहती है –
"तुम वह हो, जो तुम्हें समाज ने कभी नहीं माना।"
और मैं सुनती हूँ,
मैं अपने आप से मिलती हूँ,
और अपने सम्मान को गले लगाती हूँ।
मैं स्त्री हूँ,
मैं केवल माँ, बहन, बेटी नहीं,
मैं वह शक्ति हूँ
जो हर बाधा को चुनौती देती है,
मैं वह आत्मा हूँ
जो अपने अधिकार, अपने सम्मान और अपने अस्तित्व के लिए खड़ी होती है।
और यही मेरी लड़ाई है,
मेरी जीत की कहानी,
मेरी आत्मा की यात्रा।
मैं स्त्री हूँ,
और मैं जानती हूँ –
मेरा सम्मान, मेरी शक्ति, मेरी आत्मा
सदा अजेय है।
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