मैं बस अपनी राह की रोशनी हूं।
जिसे जगत कहे जिद या सनक,
वही मेरे सपनों की सच्ची कहानी हूं।
मैं विरोध की ज्वाला में जलती नहीं,
मैं खुद की लौ से उजियारा करती हूं।
किसी की हां से नहीं बनती मेरी पहचान,
मैं अपनी ‘ना’ भी गरिमा से कहती हूं।
मैं समझौतों की चादर में खुद को ढकती नहीं,
मैं सवालों की धूप में खिली हुई धरा हूं।
जहां झुकना जरूरी हो, झुक जाती हूं,
पर अपनी आत्मा को कभी झुकने नहीं देती हूं।
मैं तालियों की मोहताज नहीं,
मैं खामोशियों में भी खुद को सुनती हूं।
जहां दुनिया लड़ती है खुद को साबित करने में,
वहां मैं बस खुद को जीती हूं।
मैं तलवार नहीं, मैं शब्दों की नर्म सी ढाल हूं,
नफरत का उत्तर प्रेम से देती हूं।
लड़ाई अगर है तो बस अपनी कमियों से,
मैं स्वयं से स्वयं को बेहतर करती हूं।
मैं किसी के विरोध में नहीं खड़ी,
मैं बस अपने पक्ष में होती हूं।
क्योंकि मेरा सच मेरा सहारा है,
और मेरी आत्मा ही मेरी सत्ता होती है।
मेरे कदम किसी को गिराने नहीं चलते,
मैं बस अपनी उड़ान को ऊंचा करती हूं।
जो मुझे समझे—वह मेरे करीब है,
जो न समझे—उसे भी दुआएं देती हूं।
मैं इतिहास नहीं, भविष्य की लिखावट हूं,
मैं खुद अपनी पहचान की इबारत हूं।
मैं विरोध में नहीं,
बस अपने पक्ष में हूं…
और यही मेरी सबसे बड़ी हिम्मत हूं।
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