रविवार, 30 नवंबर 2025

विश्वास का विराट स्वर

मंज़िलों का पता रास्तों से नहीं,
चलने वाले के विश्वास से मिलता है।
और विश्वास उधार का नहीं होता,
यह आत्मा खुद अपने भीतर गढ़ती है —
चोटों से, अस्वीकारों से,
और उन खामोश रातों से
जहाँ हम आँसुओं के बीच भी
अपने होने का प्रमाण खोजते रहते हैं।

कहने को दुनिया बहुत है,
पर समझने को मन बहुत कम।
लोग आँखों से देखते हैं, मैं भीतर से।
उन्हें शक में तसल्ली मिलती है,
मुझे सत्य में।
इसलिए मैं वही आवाज़ दोहराती हूँ
जो भीतर अडिग खड़ी है:
“मुझे खुद पर भरोसा है — तुम अपना देख लो।”

तुम्हें लगता है मैं गिर जाऊँगी,
पर मैं जानती हूँ —
मनुष्य तभी गिरता है
जब वह स्वयं को गिरा हुआ मानने लगे।
और मैंने अपने भीतर
हार की अनुमति ही नहीं छोड़ी।
हर पराजय को मैंने अनुभव कहा,
हर दर्द को दिशा कहा,
हर विरक्ति को मोक्ष कहा
और हर ठोकर को मार्ग का विलक्षण संकेत।

जीवन गणित नहीं — दर्शन है,
जहाँ 1 हार + 1 हौसला = फिर से जन्म।
और यदि पीछे कोई नहीं,
तो इसका अर्थ यह नहीं कि मैं अकेली हूँ —
इसका अर्थ है
कि मुझे आगे बढ़ने से रोकने वाला कोई नहीं।

मैं उस ऊर्जा पर विश्वास करती हूँ
जिसे कोई समझ नहीं सकता
पर हर युग के तपस्वी, यात्री, साहसी
इसी को साधकर आगे बढ़ते रहे हैं:
आत्मस्वीकृति — आत्मविश्वास — आत्मबल।

दुनिया का मापदंड बाहरी होता है,
और मेरा भीतरी।
दुनिया पूछती है — “क्या पाया?”
मैं पूछती हूँ — “क्या समझा?”
दुनिया कहती है — “किसने साथ दिया?”
मैं पूछती हूँ — “मैंने खुद को कितना साथ दिया?”

जो भीतर से स्वतंत्र है,
उसे कोई बाँध नहीं सकता,
जो भीतर से स्वीकृत है,
उसे कोई अस्वीकार नहीं कर सकता,
और जो भीतर से खड़ा है —
उसे गिराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ।

इसलिए मैं किसी लड़ाई में नहीं,
सिर्फ अपने विकास में हूँ।
मैं किसी प्रतिद्वंद्वी के विरुद्ध नहीं,
सिर्फ अपनी सीमाओं के पार जा रही हूँ।
दुनिया को सफाई देने की जरूरत नहीं,
क्योंकि सत्य अपना प्रमाण स्वयं लेकर आता है।

तुम चाहो तो राह बदल लो,
तुम चाहो तो नज़र फेर लो,
तुम चाहो तो इंतज़ार करो मेरी असफलताओं का —
यह अधिकार तुम्हारा है।
पर मैं अपने एकमात्र अधिकार पर अडिग रहूँगी —
स्वयं में विश्वास।

क्योंकि अंत में
भाग्य, लोग, हालात, समय —
सब बदलते हैं…
पर इंसान जितना खुद पर विश्वास करता है
उतना ही ऊँचा उठता है।

और मैं उठूँगी —
बिना शोर, बिना घृणा, बिना प्रतिशोध —
केवल अपने सत्य के सहारे।

क्योंकि मुझे भरोसा है —
नसीब नहीं,
खुद पर।
बाकी दुनिया…
तुम अपना देख लो।

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