कुछ पन्ने मुड़ जाने से कहानी खत्म नहीं होती,
लम्हों की ठोकरों से
इंसान की पूरी मंज़िल तुटा करती नहीं होती।
कभी-कभी ज़िंदगी बिखरती है
सिखाने के लिए, मिटाने के लिए नहीं,
हर दर्द गिरने के लिए आता है
डूब मर जाने के लिए नहीं।
जो पल आज बेगाने लगे,
कल वही पल यादों का आख़िरी सहारा बन जाते हैं,
और जो लोग आज छोड़ गए,
कल वही क़िस्मत की रफ़ाक़त समझ आते हैं।
हर बिछड़ना अंत नहीं होता,
कभी-कभी तकदीर की नियति में
नए रास्ते के लिए पुराना कंधा हटाया जाता है।
रोओ, टूटो, थको — इंसान हो,
पर खुद को ख़त्म मत समझो,
क्योंकि मौसम बदला करता है,
लोग बदला करते हैं, हालात बदला करते हैं,
पर किस्मत भी तब बदलती है
जब इंसान टूटकर भी खड़ा रहने का फ़ैसला करता है।
जिस रात में उम्मीद का एक तारा भी न दिखे,
वहीं से सुबह पैदा होती है,
जहाँ खत्म होने का डर सबसे ज्यादा हो,
वहीं से फिर शुरूआत होती है।
ज़िंदगी एक पल में रूठती है,
पर उसी पल की गोद में
अगली मुस्कान का बीज भी छुपा होता है।
हार का भी एक वक़्त होता है —
और उसके बाद जीत का वक़्त
ठीक बगल में खड़ा इंतज़ार करता है,
बस हम उसे देखने की हिम्मत जुटाएँ
उतना काफी होता है।
जिन दरवाज़ों ने ठुकराया,
जरूरी नहीं दोष दरवाज़ों का हो —
कई बार हम वो जगह माँग रहे होते हैं
जहाँ हमारी किस्मत रहने वाली ही नहीं होती।
किसी मोड़ पर गिर जाना भी
उसी रास्ते का संकेत होता है
कि सफ़र खत्म नहीं —
अध्याय बदल रहा है।
तूफ़ान रोकते वही हैं
जिनके भीतर नदी बनने का साहस बचा होता है,
और राख सिर्फ उनको मिलती है
जिनमें फिर से जल उठने की क्षमता होती है।
कुछ क्षण अगर ख़राब भी हुए,
तो यह सबूत हैं कि
जीवन चल रहा है, रुक नहीं गया।
तो याद रखना —
जो टूटकर भी मुस्कुराए,
वो हार नहीं रहा होता,
बल्कि किस्मत को बताते हुए चलता है
कि मैं तुम्हारे हिसाब से नहीं, अपने हौसलों के हिसाब से जिऊँगा।
इसलिए…
एक बुरा दिन, एक बुरा लम्हा, एक बुरी घटना —
पूरी ज़िंदगी का फैसला नहीं करती।
ठहरकर देखो,
जहाँ दर्द खत्म होता है
वहीं से शक्ति जन्म लेती है,
और जहाँ एक दरवाज़ा बंद होता है
वहीं ज़िंदगी कहती है —
अगली मंज़िल में आपका स्वागत है।
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