कोई शोर नहीं था—
वो अपने भीतर की एक शांत दुनिया में रहती थी।
लोग अक्सर पूछते—
“तुम इतनी अलग क्यों हो?”
पर दिव्या कभी जवाब नहीं देती।
क्योंकि उसे पता था—
हर किसी को उसकी कहानी का
वो हिस्सा समझ नहीं आएगा
जिसे उसने खामोश रखा है।
दिव्या के लिए
खुशी मतलब किसी को हँसा देना।
और दर्द…
मतलब किसी की मजबूरी को महसूस कर लेना।
उसके अंदर एक अपना आसमान था—
जहाँ वह अपनी पसंद के सितारे चुनकर
अपनी तरह से रोशनी उकेरती थी।
वो कभी तालियों की भूखी नहीं बनी,
वो चाहती थी—
“जब मैं किसी के दिल में बस जाऊँ
तो मेरे जाने के बाद भी
उसे रोशनी मिलती रहे।”
हर शाम वह छत पर जाकर
हवा से बातें करती—
हवा ही उसकी सबसे अच्छी दोस्त थी।
वह हवा से कहती:
“तू लोगों तक मेरी दुआ पहुँचा देना,
मैं दिखना नहीं चाहती—
बस महसूस होना चाहती हूँ…”
उसके सपने बड़े नहीं थे—
बस इतने कि दुनिया थोड़ी कम दर्दनाक हो जाए।
और सबसे बड़ी बात—
दिव्या को खुद पर भरोसा था।
वो मानती थी—
> अगर किसी की जिंदगी में
मैं एक अच्छी याद बन जाऊँ,
तो मेरा होना
बेकार नहीं जाएगा।
उस रात आसमान में
एक टूटता सितारा दिखा।
दिव्या ने आँखें बंद कीं,
और मन-ही-मन कहा—
“मुझे और मजबूत बना देना…
क्योंकि अभी बहुत लोगों को
मेरे हिस्से की रोशनी चाहिए।”
और फिर उसने मुस्कुराते हुए
अपनी डायरी बंद कर दी—
क्योंकि उसकी कहानी अभी
खूबसूरत शुरुआत में थी। ✨
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