तुम अपने टूटे हिस्सों को चुपचाप जोड़ सकते हो,
अपने घावों को धीरे-धीरे अपने भीतर की गर्मी से भर सकते हो।
हर दर्द तुम्हारे भीतर से उभरता है,
हर आंसू तुम्हारे ही हाथों से पोंछा जाता है।
तुम जानते हो कि रोना कमजोरी नहीं है,
बल्कि यह वह कविता है जो केवल तुम्हारे दिल की धड़कन जानता है।
तुम अकेले नहीं हो—पर अकेले होने में तुम्हें शक्ति मिलती है।
तुम्हारा मन, तुम्हारा शरीर, तुम्हारी आत्मा—
तीनों एक अदृश्य तंत्र की तरह काम करते हैं।
घाव चाहे कितने भी गहरे हों,
तुम धीरे-धीरे उन्हें अपनी सांस, अपनी आँखों, अपने स्पर्श से भर देते हो।
तुम अपने लिए इतना पर्याप्त हो कि
दुनिया के शोर से तुम्हारा मन नहीं हिलता।
तुम्हारी चुप्पी भी तुम्हारे लिए गीत बन जाती है,
तुम्हारे अकेलेपन की हवा भी तुम्हें सहलाती है।
तुम्हारे भीतर एक आश्रम है,
जहाँ तुम बैठकर अपने टूटे हुए हिस्सों की बातें सुनते हो।
जहाँ हर स्मृति, हर दर्द
तुम्हारे साथ बैठकर कहता है—“मैं तुम्हारे साथ हूँ।”
तुम्हारे हाथ ही तुम्हारे घावों की मरहम हैं,
तुम्हारे कदम ही तुम्हारी राह हैं।
तुम खुद को थाम सकते हो,
खुद को फिर से उठने का साहस दे सकते हो,
खुद को फिर से पूरी तरह बनने दे सकते हो।
इसलिए, डरने की कोई जरूरत नहीं।
तुम अपने लिए पर्याप्त हो।
तुम अपने भीतर की रोशनी को
अपने ही हाथों से जलाते हो।
तुम अपने टूटने पर भी चमकते हो,
अपने अकेलेपन में भी मजबूत होते हो।
तुम अपने लिए इतने पर्याप्त हो कि
तुम्हारे भीतर का ब्रह्मांड खुद तुम्हें जोड़ता है,
तुम्हें सहलाता है,
तुम्हें फिर से जन्म देता है—
और तुम पहले से कहीं अधिक चमकते हुए उठते हो।
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