स्त्री—सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि मेरे जीवन की अनगिनत धड़कनों का संगम है। मेरी कविताओं का केंद्र बिंदु स्त्री इसलिए है क्योंकि मेरी आत्मा में उसकी संवेदनशीलता, उसकी शक्ति और उसकी गहराई हमेशा एक प्रेरणा रही है। उसकी हँसी में उजाला है, उसकी आँसूओं में गहराई, और उसकी चुप्पी में एक अजेय शक्ति। उसे समझना, उसकी भावनाओं को महसूस करना और उसके अनुभवों को शब्दों में उतारना मेरे लिए जीवन और साहित्य की सबसे सुंदर प्रक्रिया है।
मैंने स्त्री को इसलिए चुना क्योंकि उसकी हर भूमिका—माँ, बेटी, बहन, प्रेमिका या एक अकेली आत्मा—में अनगिनत कहानियाँ छुपी हैं। उसकी संवेदनाएं, उसकी इच्छाएँ, उसकी आशाएँ और उसके संघर्ष केवल उसकी ही नहीं, बल्कि हमारे सभी जीवन की तस्वीर बनाते हैं। कविताएँ लिखते समय मैं चाहती हूँ कि पाठक उसकी ताकत, उसकी पीड़ा, उसकी स्वतंत्रता और उसकी आत्मा की उज्ज्वलता को महसूस करें।
स्त्री में परिवर्तन की शक्ति है। समय के साथ वह बदलती है, अपने अनुभवों से सीखती है और दूसरों के लिए प्रेरणा बनती है। इसलिए, मेरी कविताओं में स्त्री केवल एक पात्र नहीं, बल्कि जीवन की गहराई और शक्ति का प्रतीक है। वह मेरे शब्दों का केंद्र बिंदु इसलिए है क्योंकि उसके माध्यम से मैं जीवन की जटिलताओं, संवेदनाओं और सौंदर्य को सबसे साफ और सजीव रूप में व्यक्त कर सकती हूँ।
मैं अपनी कविताओं में स्त्री के हर रूप को समेटना चाहती हूँ—आत्मनिर्भर, निडर, प्रेमपूर्ण या अपने दुखों को चुपचाप सहने वाली। हर रूप में उसकी उपस्थिति अद्भुत और अनंत है। यही कारण है कि मेरी कविताओं में उसकी उपस्थिति अनिवार्य है। उसकी कहानी केवल उसकी ही नहीं, बल्कि उन सभी कहानियों की भी है, जिन्हें उसने अपने अस्तित्व से रोशन किया है।
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