सोमवार, 15 जुलाई 2024

हमेशा पॉजिटिव रहे

"यू शुड अवॉयड टॉक्ससिटी "
"ऑलवेज बि पॉजिटिव "

ऐसा एक हमारे एक मनोविज्ञान के मित्र ने हमें कहा जब ये सुना की हम कुछ वक़्त से एंग्जायटी और डिप्रेशन में गुज़र रहे है...हमने उनसे ये कहा की
"आई ऍम ट्राइंग माय बेस्ट " और थोड़ा मुस्कुरा लिया 
फिर सोचा की जीवन में सकारात्मक तो रहना चाहते है, मगर हमेशा ऐसा मुमकिन कहाँ हो पाता है..
अधिकतर लगाव या अटैचमेंट कभी कभी एडिक्शन में भी बदल जाती है और उसका असर   हम पर बहुत बुरा तरह से दिखता है.. वो लगाव भले ही किसी चीज़ से हो या किसी इंसान से.. मगर जब उसमे टॉक्ससिटी आजाये यानी की नकारात्मकता आ जाए फिर उसे हमें तुरंत ही त्यागना चाहिए या डिटेचमेंट का प्रोसेस शुरू कर देना चाहिए...
क्यूँकि भले ही वह कुछ वक़्त के लिए तुम्हें खुशी दे रहा हो, या ग़म देगा मगर दिमागी तौर पे वह बहुत बुरा असर छोड़ जाता है, जो की शरीर के लिए हानिकारक होता है...

मैं इसी वजह से बहुत प्रयास करती हूँ खुद को पॉजिटिव रखने की और नेगेटिविटी से खुद को दूर रखने की..मेरी कोशिश ये रहती है की मैं  खुद को उन लोगों में शामिल करुँ जिनसे मुझे पॉजिटिव वाइब्स आती हो...ताकि ये आगे चलके मेरे लिए कोई समस्या ना बन सके और दिमागी तौर पे मैं सुकून से रह सकूँ।

तुम देखना

जिस रोज धरा पर हर इंसा मुस्कुराएगा।
जिस रोज आकाश पर परिंदा गायेगा।
जिस रोज मेरे सुर में तू सुर मिलाएगा।
जिस रोज ख़ुशी हरसू यूँ बिखर जाएगा।
उस रोज मेरे नग्मों का अंदाज देखना।
मेरी आवाज में एक नई आवाज देखना।।

जिस रोज़ हर पेट को रोटी मिल जायेगी ।
 जिस रोज़ हर चेहरा हँसता नज़र आयेगा ।
जिस रोज़ नंगे बदन कपड़ों से ढके होंगे ।
जिस रोज़ खुशियों में वतन डूब जायेगा ।
 उस रोज़ मेरे नग्मों का अंदाज़ देखना ।
मेरी आवाज़ में एक नई आवाज़ देखना ।।

जिस रोज पराये भी हम सबकेे होंगे।
जिस रोज पुरे सबके आखो केे सपने होंगे।
जिस रोज महका महका सा चमन होगा।
जिस रोज सबका अपना गगन होगा।
उस रोज मेरे नग्मों का अंदाज देखना।
मेरी आवाज में एक नई आवाज देखना।।
शुभ रात्री मित्रों

गुरुवार, 16 मई 2024

om ji suriya

जांगीड़ समाज चमालिशा रुपनगढ अजमेर,सभी भाईयों को राम राम ओर प्रणाम,
मेरी ये पोस्ट समाज सम्बंधित है,जो रुपनगढ की पुर्व समिति से संबंधित है,
जांगीड़ छात्रावास समाज सेवा समिति जिसका नाम था , समाज सेवा तो सिर्फ नाम बनकर रह गया,बाकी सेवा जैसा कुछ नहीं हुआ 15/16 लाख रुपए पुरे चमालीशा से आए हुए थे,जो कुछ ही लोगों में बांट दिए गये,इतना पैसा आने के बाद भी, समाज के लिए एक फुट जगह तक नहीं खरीदी गई,समाज के पैसों से जो टिन सेट बनाया कब्जे की भुमी पर वो टिन सेट भी, उखाड़कर उसके चदर भी कुछ ही लोगों ने बांट लिए ,जो पैसा भी जमा हुआ था उसका भी अता पता नहीं है , समिति में कुछ सदस्यों में पैसा बांटा गया,बाकी हिंसाब समिति के अध्यक्ष साहब के पास है पुरे हिंसाब का जो भी लेखा जोखा पुर्व समिति जांगीड़ छात्रावास सेवा समिति अध्यक्ष के पास है,जो सात साल से अटका हुआ है, समिति का हिंसाब अगर समाज को चाहिए तो आने वाली अमावस्या के दिन सम्पूर्ण क्षेत्र के जांगीड़ बंधू रूपनगढ़ पधारे ओर अगर आप सभी लोग नहीं आते हैं तो हिसाब आने की ऊमिद नहीं है क्योंकि हिसाब में कुछ ना कुछ रोड़े डाले जा रहे हैं, इसलिए पुरी समाज से आग्रह अमावस्या के दिन सभी पधारे ,ओर जिन लोगों ने ब्याज पर पैसा ले रखा है,पिछली समिति से उनसे भी आग्रह हैं की वो पैसा लौटाने की कोशिश करें, क्योंकि पैसा पुरी समाज ने दिया है, भगवान विश्वकर्मा के नाम से ये पैसा गुण नहीं करेगा अगुण ही करेगा ,मेरे पापा स्वर्गीय छोटूलाल जी सुरियां इन्होंने दो तीन नाम से पैसा ले रखा है, में उनका जो भी पैसा हे पाई पाई का हिसाब दे दूंगा,अपने पापा के नाम पर कोई कलंक नहीं लगने दूंगा,ओर जिन जिन भाइयों ने ब्याज पर जो पैसा लिया है,वो कृपया पैसा लौटाने की कोशिश करें,किश्त द्वारा भी लौटा सकते हैं, क्योंकि भगवान विश्वकर्मा जी के नाम का पैसा है फलेगा नहीं अगर कोई पैसा खायेगा तो
पुर्व समिति इस प्रकार थी
अध्यक्ष, शंकर लाल जी हर्षवाल रूपनगढ़
उपाध्यक्ष स्वर्गीय छोटूलाल जी सुरियां
कोषाध्यक्ष नाथूराम जी अठवासिया सांचोर 
हेमराज जी किंजा मालाश
गोवर्धन जी किट्या 
स्वर्गीय अशोक जी हर्षवाल  
कैलाश जी किंजा मालास 
भंवर लाल जी बरड़वा करकेड़ी
नानु जी हर्षवाल रूपनगढ़
जगदीश जी सांचोर अठवासिया
रामनिवास जी सांचोर अठवासिया
रुप। जी सांचोर 
नंदाराम जी मरवा
किशन जी किंजा मालास
गौरीशंकर जी पनेर 
राजु जी हर्षवाल रूपनगढ़
ओम जी हर्षवाल रूपनगढ़
अनिल जी हर्षवाल रूपनगढ़
राधेश्याम जी दायमा सुरिया
श्री राम जी दायमा सुरिया
गोपाल जी दायमा सुरिया
कैलाश जी सुलियाणा नुंवा
भेरु जी नुवा
मोहन जी रुघनाथपुरा
कैलाश जी पुर्व अध्यक्ष रुघनाथपुरा
श्याम जी नुंवा
मुना जी खाजपुरा
कैलाश जी निटुटी
हजारी जी भेरवाई 
कान जी करकेडी
ओर भी काफी लोग हैं जो पुरानी समिति में जुड़े हुए थे,इन लोगों की निगरानी में समिति चलती थी 
अगर पुरानी समिति का हिंसाब डुबता है तो इतने लोगों की कमजोरी है, क्योंकि मौजूदा समिति सदस्यों ने हाथ जोड़कर सबको बार बार बुलाया हिसाब लेने के लिए कोई आने को तैयार नहीं है,ओर पुर्व समिति के अध्यक्ष भी कुछ ना कुछ बात को लेकर टाल रहे हैं,कितनी कमजोर ओर लाचार समाज हैं,जो एक हिसाब नहीं ले सकते ,अगर विश्वकर्मा जी का पैसा कोई भी खाता है तो समझ लेना नाश तय है,सुखी जीवन कभी नहीं जी पायेंगे,ओर आज में खुले आम ऐलान करता हूं,पैसा डुबता है तो में सबके नाम सार्वजनिक करुंगा
क्योंकि ये पैसा समाज का है विश्वकर्मा जी का है किसी एक का  नहीं है , 

अगर किसी को बुरा लगे तो पैसा लौटाने की कोशिश करें अमावस्या मिटीग में..