शनिवार, 28 नवंबर 2020

होना चाहिए

फैसला जो कुछ भी हो मंज़ूर होना चाहिए
जंग हो या इश्क़ हो, भरपूर होना चाहिए

भूलना भी है ज़ौरी याद रखने के लिए
पास रहना है तो थोड़ा दूर होना चाहिए

अपने हाथों से बनाया है खुदा ने आप को
आप को थोड़ा-बहोत मग़रूर होना चाहिए

कट गई है उम्र सारी जिनकी पत्थर तोड़ते
अब कोई हाथों में कोहेनूर होना चाहिए

सोमवार, 23 नवंबर 2020

मन की देह

क्या तुम्हें पता है
 मन की भी एक देह होती है जो
 स्पर्श की भूखी होती है

 कुछ ख्वाहिशें ऐसी भी होती हैं
 जिनकी चाहत हमेशा रहती है
 और तुम्हारा स्पर्श.. आयु से परे
 बेपनाह खूबसूरती का एहसास कराता है 
 यूं तो तुमने मुझे छुआ भी नहीं
 पर तुम्हारा यह अनछुआ स्पर्श
 मुझे अंदर तक सर्दियों में
 भी पिघला देता है... 

 ऐसा लगता है.. 
 जैसे कहीं यह स्पर्श 
दरखत सा बढ़ रहा है 
 और मैं बूंद.. सागर से लड़ती हुई सी 
 प्रेम में लिपटे इस स्पर्श की भाषा
 कहीं अंदर रूह तक छू जाती है

 पर इतना तो जानती हूं
 यह प्रेम से विरह.. आंसू से खुशी तक
 भावनाओं से स्पर्श तक की यात्रा
 कभी देखी नहीं जाती बल्कि 
 मन से महसूस की जाती है

 वैसे ही जैसे.. धरती आकाश
 कभी मिलते नहीं.. कोई स्पर्श नहीं
 पर स्नेह और संबंध का
क्षितिज सीमांत.. से सुंदर कोई
 और उदाहरण  ही नहीं..
उदाहरण  ही  नही..