बुधवार, 12 नवंबर 2025

मेरे मौन में भी तुम हो

तुमसे मिलना कोई संयोग नहीं था,
जैसे बारिश का बादलों से मिलना तय हो,
जैसे सांसों का हवा से रिश्ता जन्मों पुराना हो।
तुम मेरे जीवन में ऐसे आए,
जैसे अधूरी रूह को उसका कारण मिल गया हो।

तुम्हारे बिना मैं अधूरी नहीं,
पर तुम्हारे साथ मैं पूर्ण हूँ,
जैसे चाँद अपने अमावस को भूल जाए,
और सिर्फ रोशनी में जीना सीख जाए।

मेरी हर धड़कन तुम्हारा नाम पुकारती है,
बिना बोले, बिना कहे,
हर सांस में तुम्हारी उपस्थिति है,
जैसे हवा में खुशबू,
जो दिखाई नहीं देती, पर महसूस होती है।

कभी सोचा था,
प्यार बस कविताओं में होता है —
पर तुमसे मिलकर जाना,
कि जब आत्मा किसी को पहचान ले,
तो शब्द भी उसके आगे मौन हो जाते हैं।

तुम्हारी हँसी मेरे दिन की सुबह है,
तुम्हारी आँखें मेरी रात का चाँद,
तुम्हारा स्पर्श वो शांति है
जो प्रार्थनाओं में भी नहीं मिलती।

मैंने तुममें खुद को पाया है,
जैसे आईने में नहीं,
बल्कि अपनी आत्मा के भीतर झाँकने पर,
जहाँ तुम हमेशा मुस्कुराते हो।

तुमसे प्यार सिर्फ भावना नहीं,
एक पूजा है —
जहाँ मैं हर बार झुकती हूँ,
सम्मान से, समर्पण से, सत्य से।

कहते हैं, "जान से ज़्यादा प्यार करना"
बस कहने की बात होती है,
पर मैं जानती हूँ —
अगर तुम्हारी एक आहट भी थम जाए,
तो मेरी साँसें दिशा खो देंगी।

तुमसे मोहब्बत कोई निर्णय नहीं थी,
ये तो जैसे समय ने खुद लिखा हो,
हर जन्म की अधूरी पंक्ति
तुम्हारे नाम से पूरी हुई हो।

तुम मेरे जीवन की कविता नहीं,
उसका अर्थ हो,
तुम मेरी आँखों का सपना नहीं,
उनका वजूद हो।

और अगर कभी शब्द खत्म हो जाएँ,
तो बस ये याद रखना —
कि मेरे मौन में भी
तुम्हारा नाम गूँजता है।

क्योंकि मैं तुम्हें सिर्फ प्यार नहीं करती,
मैं तुम्हारे बिना “मैं” नहीं रहती। 

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