गुरुवार, 6 नवंबर 2025

मेरा युद्ध

ये मेरा युद्ध है—
किसी रणभूमि का नहीं,
मेरे ही भीतर उठते शोर का है।

यहाँ तलवारें नहीं,
संकल्प टकराते हैं।
यहाँ दुश्मन कोई और नहीं,
बस कल का मेरा ही स्वरूप है।

लोग समझें या नहीं—
ये लड़ाई दुनिया को जीतने की नहीं,
खुद को हर हार से
फिर उठाने की है।

और याद रखना—
जो युद्ध भीतर जीता जाता है,
वही बाहर इतिहास बनाता है। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें