सोमवार, 8 दिसंबर 2025

अपनी तरह बनो

बन जा अपनी तरह…
क्योंकि दुनिया में नक़्शे बहुत हैं, चेहरे कम हैं,
और किरदारों की भीड़ में असलियत अकेली दमकती है।

किसी और की चाल चलोगी तो रास्ते मिलेंगे पर मंज़िल खो दोगी,
किसी और की आवाज़ बोलोगी तो शब्द मिलेंगे पर पहचान खो दोगी।

तुम्हारा होना — तुम्हारी सबसे बड़ी ताक़त है,
वरना नकलें तो बाज़ार में बिकती हैं… पर असल लोग इतिहास में लिखे जाते हैं।

खुद की तरह चलो…
चाहे धीमे चलो, चाहे टूटकर चलो — पर अपने कदमों से चलो,
क्योंकि दुनिया तालियाँ अपनेपन पर बजाती है,
और नकल पर सिर्फ़ हंसती है।

जो भी बनना है — वही बनो जो भीतर चुपचाप पल रहा है,
क्योंकि बाकी सब तरह के लोग तो पहले ही बन चुके हैं,
अब बारी तुम्हारी तरह बनने की है।

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