मैं भी हूँ — और तू भी है
जिसने चुप्पी को ओढ़ लिया सरेआम
वो बेआवाज़ किरदार
मैं भी हूँ — और तू भी है
समय की हथेली से फिसल गए जो वादे
उनका कर्ज़दार
मैं भी हूँ — और तू भी है
न कोई जीत का जश्न बचा
न हार का हक़
बस एक अधूरा इकरार
मैं भी हूँ — और तू भी है
अपने–अपने सच में क़ैद होकर
जो आज़ादी को तरसे
वो बेक़रार
मैं भी हूँ — और तू भी है
किसी मोड़ पर अगर मिल जाए नज़रें
तो कहना मत “सब ठीक है”
क्योंकि इस बिखराव का
इक़रार
मैं भी हूँ — और तू भी है
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