मैं बस ये सुनिश्चित करती हूँ
कि मेरी ख़ामोशी किसी को डराए नहीं।
तुम देखते हो मेरी जीतें,
पर मेरे हारने का हर पल
मैंने अपने ही भीतर दफन किया है —
ताकि कोई यह न जान सके
कि मैं भी कभी टूटी थी।
मेरी आवाज़ में जो ठहराव है,
वो आत्मविश्वास नहीं —
वो अनगिनत टूटे शब्दों की राख है
जिन्हें बोलने की अनुमति आज तक नहीं मिली।
मेरी रीढ़ सीधी है,
पर वो झुकी थी कभी,
बस मैंने झुकने के उस पल को
किसी की नज़रों तक पहुँचने नहीं दिया।
लोग कहते हैं — “तुम्हें दर्द नहीं होता होगा,”
और मैं मुस्कुरा देती हूँ,
क्योंकि सच बताने का मतलब होता
अपने खुले घावों को भीड़ में पेश करना —
और मैं इतनी असुरक्षित नहीं पड़ सकती।
तुम्हें क्या लगता है,
ताक़त मैं चाहती थी?
नहीं…
वो तो एक दिन दर्द की अत्यधिक सच्चाई ने
मुझे जबरन पहनाई थी।
कभी-कभी रात के सन्नाटे में
मैं अपना ही नाम पुकारती हूँ,
जैसे खुद को यकीन दिला रही हूँ
कि मैं अभी भी यहाँ हूँ…
उस दुनिया के पीछे छिपी
जो मुझसे ताक़त की उम्मीद करती है।
अगर किसी दिन मेरा मुखौटा गिर जाए,
तो उसे गिरा हुआ चेहरा मत समझना—
वो मेरे दर्द का चेहरा होगा,
जो पहली बार साँस लेने की इज़ाज़त पाएगा।
मैं मजबूत हूँ… पर इसलिए नहीं कि दर्द कम है,
बल्कि इसलिए कि दर्द इतना विशाल है
कि उसे दुनिया के सामने रखना
मेरी सबसे बड़ी हार होती।
इसलिए…
मुस्कान मेरा हथियार है,
ताक़त मेरा मुखौटा,
और दर्द —
मेरा सबसे निजी, सबसे पवित्र सच।
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