यदि तुम
मेरे अंदर की लेखिका से प्रेम कर बैठे,
तो सावधान रहना…
मैं कागज़ की दुनिया नहीं लिखती,
मैं आत्माओं की तकदीरें लिख दिया करती हूँ।
मेरे शब्द
स्याही से नहीं — रक्त—स्मृति—और अधूरी चीखों से जन्म लेते हैं,
मेरी कलम
कभी दुआ बन जाती है,
कभी बद्दुआ के समान अनंत तक पीछा करती है।
अगर तुमने मुझे प्यार किया —
तो मैं साधारण प्रेमिका नहीं बनूँगी…
मैं तुम्हारी कहानी बन जाऊँगी।
तुम्हारी रगों में बहूँगी,
तुम्हारी नब्ज़ में बोलूँगी,
तुम्हारे सपनों पर राज करूँगी,
तुम्हारे भाग्य पर हस्ताक्षर कर दूँगी।
मैं वो आग हूँ
जो राख न होने दे…
और वो अमरता हूँ
जो मृत्यु तक को परास्त कर दे।
इसलिए सोच लेना —
मेरी आँखों में डूबने से पहले,
मेरी मुस्कान में खोने से पहले,
मेरे शब्दों को छूने से पहले—
क्योंकि
यदि तुम मेरे अंदर की लेखिका से प्रेम कर बैठे,
तो फिर मैं तुम्हें छोड़ंगी नहीं,
मैं तुम्हें भूलने भी नहीं दूँगी,
और मिटने भी नहीं दूँगी।
तुम्हारा अस्तित्व
मेरी कहानी की मिट्टी बन जाएगा,
और मैं…
तुम्हें सृष्टि के अंत के बाद भी
जीवित रखूँगी।
अमर।
अलिखित।
अधूरा पर सिर्फ मेरा।
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