जो सिर्फ़ अपने लिए जीते हैं,
वक़्त की धूल में कहीं खो जाते हैं,
नाम रहता नहीं, बस चेहरे बदल जाते हैं,
और इतिहास की सांसों में
उनके किस्से भी पतझड़ की पत्तों-से गिर जाते हैं।
पर जो दूसरों के लिए जलते हैं दीपक बनकर,
अपना दर्द छुपाकर उजाला बाँटते हैं,
वे देह के मौन हो जाने पर भी
दुनिया के दिलों में बोलते रहते हैं।
जो अपने हिस्से के आकाश को छोटा कर
किसी अनजान के जीवन में सुबह उतार दें,
जो मुस्कान किसी और पर लिखने के लिए
अपनी रातें जागकर गुजार दें,
वे मोहब्बत की किताब के वो पन्ने हैं
जिन्हें सदियाँ पलटती तो हैं
पर फाड़ नहीं पातीं।
ये शरीर मिट्टी है, ये साँसें उधार हैं,
सफ़र की मंज़िल भी एक दिन रुक जाएगी —
परंतु कर्म, उपकार और प्रेम से भरा हुआ जीवन
क़ब्र की मिट्टी से उठकर भी
दुनिया में उजास फैलाएगा।
मरना सबको है…
पर सबको स्मरण नहीं मिलता।
जीना सब सीख लेते हैं…
पर सब अमर नहीं बनते।
जो खुद के लिए जिए,
समय की भीड़ में एक चेहरा बनकर रह गए—
और जो दूसरों के लिए जिए,
यादों की भीड़ में एक नाम बनकर बस गए।
अंत में,
ज़िंदगी बस उतनी नहीं कि कितनी लम्बी चल गई —
असल ज़िंदगी वो है जो किसी और के अँधेरे में
आपकी वजह से एक दियासलाई-सी जल गई।
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