तुझसे क्या गिला करू ऐ जिंदगी मेरा सफर तनहा।
साथ थी सिर्फ मेरी परछाई मेरे दर्द का असर तनहा।।
जाने किस राह गुजर से चला गया वो जाने वाला।
रह गयी मै वीराने में अकेली हुवा मेरा बसर तनहा।।
ढूँढती है निगाह जिसको वो तो आया ही नही कभी।
खेल तो देख लो किश्मत का की अब नजर तनहा।।
शहर उजड़ा है इस दीवानी का एक हवा के झोके से।
अब तो चल दे इस गली से अब ना यहाँ ठहर तनहा।।
अश्कों से बया है हाल मेरे दिल सब के अरमानो का।
उमड़ ना जाए कही आज दर्द का कोई लहर तनहा।।
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