बड़ा गुमान था तुमपर
की मेरा साथ निभाओगे
नही मालुम था मुझको
की तुम मुझे आजमाओगे।
दुनिया के भीड़ से तुझको
रखा था संभाल के
पर भूल गयी थी की
तुम हो हस्ती कमाल के।
दिखा के ख्वाब आँखों को
मुझे फिर सताओगे
नही मालुम था मुझको
की तुम मुझे आजमाओगे।
तुम्हारी बातें ही मेरे
जीने का सहारा है
तेरे सिवा जहाँ में
और क्या हमारा है।
बहला के दिल को मेरे
यु तुम चले जाओगे
नहीं मालुम था मुझको
की तुम मुझे आजमाओगे।।
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
बुधवार, 30 सितंबर 2015
तुम मुझे आजमाओगे
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