रविवार, 27 सितंबर 2015

काश!!

काश!सपने भी सच होते
आँखो में सज के
जीवन में उतर आते
पर....
सपनों की कोई
हकीकत नही होती
रात के अंधेरों में
सजते है
दिन के उजाले में
उतर जाते है
काश....
सपने भी सज जाते
जीवन में उतर जाते
ना टूटने का दर्द होता
ना छूटने का कसक
लेकिन
सच तो ये है की
सपनो की कोई
हकीकत नही होती
काश...
सपनो की उड़ान
जीवन का यथार्थ
होता
उड़ता पंख पसार कर
खुले आसमान में
झूठ से परे
सच के तले
ना छूटने का कसक
ना टूटने का दर्द
काश...
ये सपने भी जीवन
का यथार्थ होते.....

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