काश!सपने भी सच होते
आँखो में सज के
जीवन में उतर आते
पर....
सपनों की कोई
हकीकत नही होती
रात के अंधेरों में
सजते है
दिन के उजाले में
उतर जाते है
काश....
सपने भी सज जाते
जीवन में उतर जाते
ना टूटने का दर्द होता
ना छूटने का कसक
लेकिन
सच तो ये है की
सपनो की कोई
हकीकत नही होती
काश...
सपनो की उड़ान
जीवन का यथार्थ
होता
उड़ता पंख पसार कर
खुले आसमान में
झूठ से परे
सच के तले
ना छूटने का कसक
ना टूटने का दर्द
काश...
ये सपने भी जीवन
का यथार्थ होते.....
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
रविवार, 27 सितंबर 2015
काश!!
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