रविवार, 27 सितंबर 2015

हा मुझे मुहब्बत है तुझसे

जलती हुयी रूह कहती है की तुम्हे भुला दूँ।
मगर दिल कहता है मुझे मुहब्बत है तुमसे।।

आँखो में अंगारे सजा लूँ सारे सपने जला दूँ।
मगर दिल कहता है जीने की चाहत है तुमसे।।

हसरते क्या है ? एक दर्द का मंजर ही तो है।
मगर दिल कहता है मुझे कुछ राहत है तुमसे।।

बहुत टूट चुकी हूँ तुमको सहते सहते मै भी।
मगर दिल कहता है मेरी ख्वाहिशे है तुमसे।।

लब सी लूँ  कुछ कहना नही मुझे मेरे लिए।
मगर दिल कहता है मुझे शिकायत है तुमसे।।

हा कहना है आज फिर दिल की बात सुन लो।
दिल कुछ भी कहे पर मुझे मुहब्बत है तुमसे।।
      शुभ रात्री

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