दर्द मेरा सहरा था अब समुन्दर हो गया।
बड़ा अजीब सा इस दर्द का मंजर हो गया।।
तकदीर की गवाही थी और वक्त का तकाजा।
आज फिर से मै देखो मस्त कलंदर हो गया।।
आइना तो अब भी वही है सदियों से रहा।
बात और है की अक्स मेरा बंजर हो
गया।।
खामोशियाँ मेरी उसे खलती नही कभी।
वो दर्द देके आज सिकंदर हो गया।।
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