कभी प्रणय के गीत लिखू
तो कभी हृदय की
पिर लिखूँ अब तुम
ही बता दो
इस जलती कलम से
क्या लिखूँ।
संवेदना के स्वर लिखूँ
या आहत मन के
भाव लिखूँ अब
तुम ही बता दो
इस जलती कलम से
क्या लिखूँ।
धैर्य की बाते या
अश्कों की बरसाते लिखूँ
प्रेम की हार
या कुंठा की मार लिखूँ
अब तुम ही बता दो
ना इस जलती
कलम से क्या लिखूँ।
शब्दों की खामोशी
या भावों की मदहोशी।
कुछ सवाल या
सवालो के जवाब लिखूँ
अब तुम ही बता दो
इस जलती कलम से
क्या लिखूँ??????
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
सोमवार, 28 सितंबर 2015
जलती कलम से क्या लिखूँ
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