अब दिन भी मेरा रात की तन्हाइयों सा है।
गजब शोर में जो तेरी आवाज नही है।।
गूंजती है बेसबब आवाज भी यहाँ।।
हलचल जो मचा दे वो बात नही है।।
कारवां गुजरा है मेरे साथ भी बहुत।
पर ऐ हमसफर तेरा साथ नही है।।
दुनिया के रंगमंच पर अजब सी भीड़ है।
हर किसी में तुझसा अंदाज नही है।।
आगाज मैंने देखा अंजाम भी दिखा।
हर शख्स यहाँ तुझसा बेहिसाब नही है।।
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