बुधवार, 30 सितंबर 2015

आओ तुम्हे एक खुला आसमान दे दूँ

आओं एक बार तुम्हे
कुछ सामान दे दू।
खुले आसमान के नीचे
एक नया आसमान दे दू।
मांग ले अगर तू तो
तुम्हे सारा जहां दे दू।
इबादत करती हु जिसकी
अपना वो भगवान दे दू।।
आओं एक बार तुम्हे
कुछ सामान दे दू।
दिल में छुपा के रखा है जो
वो सारे अरमान दे दू।
बिगड़े हालात के साथी थे जो
मै वो सारे इंसान दे दू।
मेरी खुदगर्जी की पहचान है जो
अपना वो ईमान दे दू।
आओ एक बार तुम्हे
कुछ सामान दे दू।
आओ ना!
एक बार तुम्हे
फिर से एक खुला
आसमान दे दू!!!!!!

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