मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
बुधवार, 30 सितंबर 2015
वजूद को दर्पण मिला
चलो जिन्दगी का कुछ
तजुर्बा तो मिला
राह चले तो कुछ सिला
तो मिला....
कुछ हार मिला तो
कुछ जीत तो मिला
कुछ अपने मिले
कोई बेगाना भी मिला
समर्पित है जीवन
समर्पित है तन मन
मुझे मेरे वजूद का
एक दर्पण तो मिला।।
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