चलो पत्थर पर फूल
उगाया जाये
कुछ पागलपन
दुनियां को दिखाया जाये
कहते है सब लोग
यहाँ जिन्दगी शर्तो
पर नही चलती चलो
ना एक बार अपनी शर्तो
पर दुनियां को घुमाया जाये।
आओ कुछ पागलपन
दुनियाँ को दिखाया जाये।
क्या होगा क्या नहीं
होगा।
ये तो कोई जवाब नही।
क्यों मान ले आसानी
से जिन्दगी का कोई
हिसाब नही।
जिसका कोई उत्तर न हो
ऐसा कोई सवाल नही।
अपनी ही बातो को
खुद पर आजमाया जाये।
कुछ पागलपन दुनियाँ
को दिखाया जाये।
आओ ना एक बार
पत्थर पर फूल उगाया जाए।।
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
बुधवार, 30 सितंबर 2015
चलो पत्थर पर फूल उगाया जाए
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