बुधवार, 30 सितंबर 2015

मुट्ठी में आसमान भर लूँ

टूटते बिखरते सपनो को
जोड़ने की कोशिश करती
मै काश खुद की
पहचान कर लूँ....
चल आज फिर अपनी
मुट्ठी में सारा आसमान
भर लू..
खोज लू खुद के लिए
राह अगर साथ दे दो
तुझमे खो के मै
जिन्दगी आसान कर लू
चल एक बार फिर
अपनी बंद मुट्ठी में
सारा आसमान
भर लूँ...
तू अगर साथ दे दे
चुन लू कुछ सपने
नये
तू अगर साथ दे दे
बुन लू कुछ अरमां
नये..
खुद अपने ही लिए
कुछ अहसान कर लूँ
आओ ना एक बार
फिर
अपनी मुठ्ठी में सारा
आसमां भर लूँ...
संभव है तेरे साथ से
सब कुछ हासिल हो
मिल जाए वह राह
जो मेरे काबिल हो
आओ ना तेरे साथ
एक राह चुन लूँ
एक बार खुद की बंद
मुट्ठी में सारा आसमान
भर लूँ...आओ
तुझसे जुड़ के
खुद की पहचान कर लूँ
आओ ना.....

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