रविवार, 27 सितंबर 2015

लिख दी

कागज के टुकड़ो पर हमने जिंदगी लिख दी।
दिल में दबी ख्वाहिश और हर ख़ुशी लिख दी।।

अल्फाजों के बहुत धनी तो नही थे फिर भी।
कुछ शब्दों को जोडा और एक शायरी लिख दी।

दर्द को जब भी पढ़ा तो झूम गए लोग यहाँ।
जब भी खुद को एक बेबस सी तस्वीर लिख दी।

बात मुझमें नही कुछ भी उस सख्स में ही थी।
जिसके नाम हमने अपनी ये तकदीर लिख दी।।

आज फिर कुछ शब्द जुड़ गए दिल के भावों में।
जिंदगी को जब आशिकी और तेरी प्रीत लिख दी।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें