मुझसे मुहब्बत की बात करते हो।
बता दो किस जहाँ में रहते हो।।
रोज लिखते हो फ़साने इश्क के।
वफ़ा किस बला को कहते हो।।
मेरे शुरुर में उठी है नई बात कोई।
कौन सी आग में तुम जलते हो।।
शहर का शहर लूट गया है देखो तो।
किस खुशफहमी में तुम रहते हो।।
ना भाये आज तेरे गीत हमे दिव्या।
जिसको तुम गजल ही कहते हो।।
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