तुम कौन हो जो
जो मेरे वजूद में
उतर जाते हो चुपके से....
तुम कौन हो जो मेरे
गीतों में सज जाते हो
चुपके से....
मेरी रूह बनके तो
कभी सुर बनके।
कौन हो तुम!
कितनी बार देखा है
तुम्हे अपनी पलकों
पर सजते हुए
कितनी बार देखा है
तुम्हे अपनी सासों
में घुलते हुए..
कौन हो तुम जिसके
ख्याल से ही वांछा
खिल जाती है
अस्तित्व हिल जाता है।
कितनी बार देखा है तुम्हे!
कौन हो तुम जो
ख्यालो में बस जाते हो
चुपके से...
कौन हो! तुम????
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
बुधवार, 30 सितंबर 2015
तुम कौन हो?
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