कैसा रिश्ता है उससे हमारा
ना वो गैर है ना अपना है।।
महसूस करती हु हर पल उसको
खुली आखो में बसा कैसा सपना है।।
उसे पाने का कोई इरादा नही बेशक।
पर उसके बिन कैसे रहना है।।
सवर लिया है उसके खातिर।
वो रूप का मेरे सुंदर गहना है।।
चाहत ऐसी मिली है मुझको उससे।
आसूँ बन खुद आँखों से बहना है।।
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