तुम पर ही शुरू करुँगी मै
प्रेम का समर्पण।
तुमपर ही ख़त्म होगी
बेमोल अब ये जीवन।
तुम एहसासों में बध गये हो
साँसों में घुल गये हो
मन में समा के देखो
धड़कन ही बन गये हो
जिस राह पर चलोगे
वो राह मेरी होगी
थक के कही रुके तो
वो बाह मेरी होगी....
तुमसे ही जल उठा है
आशाओं का ये दीपक।
तुम पर ही ख़त्म होगी....
तुम सुर बन गये हो
मै गीत की हु लड़िया
तुझे गुनगुनाऊ मै अब
न बिते अब ये घड़िया।
मेरा समर्पण तुझको
उस राह पर ले आये
जहाँ से तेरी मंजिल मेरा
प्यार ही बन जाए।
तू रूह बनके उतर जा
तेरी ही आरजू है।
बस तेरी ही आरजू है..
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
बुधवार, 30 सितंबर 2015
बस तेरी ही आरजू है
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