बुधवार, 30 सितंबर 2015

क्यों है

बिखरे थे हम तुझसे मिलने से पहले
आज सिमटे हुए सारे अरमान क्यों है।

चाहत थी कोई आके थाम ले मुझको
बदले हुए से आज हालात क्यों है।

मै तनहा थी दुनिया वीरानी थी मेरी
महके हुए से आज दिन रात क्यों है।

तुझमे ही सारी दुनियां सिमटी है मेरी
तुझसे ही शुरू मेरी हर बात क्यों है।

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