मै तनहा जिन्दगी के सफर में थी अबतक
मेरे पास तेरे प्यार की जंजीर नही थी।
बहुत चाहा तुझे ऐ जिन्दगी हमने पर
मेरी ऐसी खुबसूरत तकदीर नही थी।
तो हाथ ही जख्मी कर लिया हमने
जिसमे तेरे प्यार की लकीर नही थी।
तुझे देखा था भरी भीड़ में तनहा मैंने
पर मेरे आँखों में तेरी तस्वीर नही थी।
तूने देखा भी नहीं एक बार पलटकर
शायद मेरे हक़ में वो तदवीर नही थी।।
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