समय बदला
सोच बदला
इंसान बदला
तबतक तो ठीक
ईमान बदल गया
परेशान बहुत हूँ.....
आदत बदली
चाहत बदली
हसरत बदली
तबतक तक तो ठीक
फितरत बदल गयी
परेशान बहुत हूँ.....
अदब बदला
लिहाज बदला
अंदाज बदला
तबतक तो ठीक
नियत बदल गयी
परेशान बहुत हूँ....
सपने बदले
अपने बदले
सुरत बदला
तबतक तो ठीक
सीरत बदल गयी
परेशान बहुत हूँ....
घर बदला
रिश्ते बदले
नाते बदले
तबतक तो ठीक
तू भी बदल गया
परेशान बहुत हूँ....
मै परेशान बहुत हूँ..
मैं एक कवयित्री और लेखिका हूँ, जो शब्दों में अपनी भावनाओं की छवियाँ उकेरती है। यह मेरा छोटा-सा संसार है, जहाँ एहसास कविता बनकर और अनुभव शब्द बनकर जीवित हो उठते हैं।
बुधवार, 30 सितंबर 2015
मै परेशान बहुत हूँ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें