रविवार, 4 अक्टूबर 2015

सोच बदलो

दोस्तों आज वक्त और हालात दोनों बदल गए है आधुनिकता की दौड़ में हम इतने आगे निकलते जा रहे है की समय के साथ हमारी सोच भी बदलती जा रही है जिसका प्रभाव हमारी संस्कृति और सभ्यता पर भी पड़ रहा है। वक्त के साथ आगे बढे ये तो एक हद तक ठीक है पर ऐसा ना हो कीवक्त की आँधी में हम बह जाए और सबकुछ हमसे छूट जाए। मिले तो बस एक तिश्नगी की हमने क्या खोया और क्या पाया~~~

है इस जहाँ में बेशुमार आदमी।
पर खुद में ही है बेजार आदमी।।

खुद बर्बादियों की वजह बन गया।
फिर भी टुटा नही खुमार आदमी।।

साथ मंजर वो सारे बिखर से गए।
है कितना खुद में खुद्दार आदमी।।

शौक सीढ़ी बना के बढ़ तो गया।
पर अंदर ही अंदर बीमार आदमी।।

जिंदगी वक्त के साथ ढल जायेगी।
और हो जाएगा तू लाचार आदमी।।

चल बदल सोच दुनियाँ में रहकर जरा।
वक्त मिलता नही है हर बार आदमी।।

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